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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। कैबिनेट ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। बैठक के दौरान राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान मंत्रिमंडल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से की गई तैयारियों और इसके वर्तमान परिदृश्य से अवगत करवाया गया। 


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कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने आउटसोर्स पर स्टाफ रखने का फैसला लिया है। इसमें नर्स, रेडियोग्राफर, फार्मासिस्ट आदि अन्य पैरा मेडिकल शामिल है। यह स्टाफ तीन महीने के लिए रखा जाएगा। आवेदकों का प्रशिक्षित होना जरूरी है। इनकी सेवाएं अस्पतालों और फील्ड में ली जाएंगी। सरकार ने वर्ष 2018 और इससे पहले रिटायर हुए डॉक्टरों की सेवाएं फिर से लेने का फैसला लिया है। इसके अलावा जो कर्मचारी व अधिकारी मार्च व अप्रैल में सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें जून से पहले सेवानिवृत्त नहीं किया जाएगा। 

सरकार ने फैसला लिया है कि जितने भी डिप्लोमा धारक आवेदन करेंगे। उन सबकी सेवाएं ली जाएंगी। मासिक वेतन सरकार ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद बताएगी। कैबिनेट बैठक में इसका फैसला लिया गया।  मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद के भी निर्देश दिए। कैबिनेट ने लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज नेरचौक मंडी को कोविड-19 के लिए समर्पित अस्पताल बनाने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। मंत्रिमंडल ने कोरोना के सक्रिय मामले खोजने का अभियान चलाने का निर्णय लिया और इस अभियान को शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

राज्य में औद्योगिकरण को बढ़ावा देने व उद्यमियों की सुविधा के लिए मंत्रिमंडल ने प्रोत्साहन प्रदान करने और स्टांप और पंजीकरण शुल्क में छूट/घटाने का निर्णय लिया। अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, विनिर्माण उद्यमों में संयत्र और मशीनरी में 10 करोड़ रुपये तक का निवेश व सेवा उद्यमों की निर्दिष्ट श्रेणी के मामले में उपकरणों में पांच करोड़ स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की रियायती दर 50 प्रतिशत, 30 प्रतिशत और लागू दरों का 10 प्रतिशत निर्धारित पट्टा राशि पर लिया जाएगा।

इसी तरह जिन उद्यम, विनिर्माण उद्यमों में संयत्र और मशीनरी में 10 करोड़ रुपये तक का निवेश व सेवा उद्यमों की निर्दिष्ट श्रेणी के मामले में उपकरणों में पांच करोड़ स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की रियायती दर 50 प्रतिशत, 30 प्रतिशत और लागू दरों का 20 प्रतिशत के हिसाब से लिया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित एंकर उद्यमों, जिनकी निश्चित पूंजी निवेश 200 करोड़ रुपये से ज्यादा है और नियमित तौर पर 200 से ज्यादा हिमाचलियों को रोजगार प्रदान किया है, स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क पर रियायत के लिए पात्र होंगे। 

प्रदेश मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को जिला सोलन के बद्दी के केंडुवाल गांव में एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन प्रोजक्ट के लिए पट्टे पर जमीन देने को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए उद्योग विभाग की जमीन 25 साल की अवधि के लिए पट्टे पर देने के मंजूरी दी है। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में लंबे समय से प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कचरा प्रबंधन प्रोजेक्ट की मांग प्रमुखता से की जा रही थी। इस प्रोजेक्ट को सिरे लगाने के लिए सरकार लंबे समय से कसरत कर रही थी ताकि औद्योगिक क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण को कम किया जा सके।



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